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ITR Filing 2026: 31 जुलाई की डेडलाइन छूट गई तो क्या 31 अगस्त तक ITR-3 भर सकते हैं? जानिए नियम

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Alam Ki Khabar: ITR-1 और ITR-2 की 31 जुलाई की डेडलाइन छूटने पर क्या ITR-3 भर सकते हैं? जानिए सही ITR फॉर्म, बिलेटेड रिटर्न के नियम और लेट फीस से जुड़ी पूरी जानकारी।

पटना, 22 जुलाई। आलम की खबर: देशभर में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकांश व्यक्तिगत करदाताओं के लिए 31 जुलाई 2026 रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के मन में यह सवाल है कि यदि ITR-1 या ITR-2 समय पर दाखिल नहीं हो पाए तो क्या 31 अगस्त तक ITR-3 दाखिल कर सकते हैं? कर विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल अंतिम तिथि अलग होने के कारण कोई भी करदाता अपनी सुविधा के अनुसार ITR फॉर्म नहीं चुन सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार ITR फॉर्म का चयन आय के स्रोत के आधार पर होता है, न कि उसकी अंतिम तिथि के आधार पर। यदि कोई व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 भरने के लिए पात्र है तो उसे वही फॉर्म भरना होगा। केवल अधिक समय मिलने के कारण ITR-3 दाखिल करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा।

कर सलाहकारों का कहना है कि गलत ITR फॉर्म दाखिल करने पर रिटर्न को 'डिफेक्टिव रिटर्न' घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग करदाता से स्पष्टीकरण मांग सकता है और रिटर्न दोबारा दाखिल करने की नौबत भी आ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों की आय केवल वेतन, पेंशन, बैंक ब्याज, पूंजीगत लाभ या एक आवासीय संपत्ति से होती है, उन्हें ITR-1 या ITR-2 ही दाखिल करना चाहिए। वहीं जिन करदाताओं की आय व्यवसाय या पेशे से होती है, उनके लिए ITR-3 निर्धारित किया गया है।

यदि कोई पात्र करदाता 31 जुलाई 2026 तक ITR-1 या ITR-2 दाखिल नहीं कर पाता है तो उसे गलत फॉर्म भरने के बजाय आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प मिलता है।

हालांकि देर से रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है। नियमों के अनुसार 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है। यदि कुल आय 5 लाख रुपये से कम है तो अधिकतम 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। इसके अलावा बकाया कर पर ब्याज भी देना पड़ सकता है और कुछ मामलों में टैक्स लॉस को अगले वर्षों में समायोजित करने का लाभ भी नहीं मिल सकता।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने से पहले अपनी आय के स्रोत की सही जानकारी लेकर उसी के अनुसार उपयुक्त ITR फॉर्म का चयन करना चाहिए। गलत फॉर्म भरने के बजाय यदि देरी हो जाए तो नियमानुसार बिलेटेड रिटर्न दाखिल करना ही बेहतर विकल्प है।

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आयकर रिटर्न भरते समय जल्दबाजी में गलत फॉर्म चुनना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है। सही ITR फॉर्म का चयन और समय पर रिटर्न दाखिल करना ही सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जाता है।

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